Video lectures for 9th, 10th, 11th and 12th Maths, Physics and Chemistry in Hindi and English Medium SSC CGL and SSC CHSL, IBPS CWE Clerk and PO, full notes, books , sample papers, previous year solved question papers free download. Free video course for avilable on www.sureshlecturer.blogspot.in

Wednesday, November 8, 2017

10th class Maths Video Lectures

Video Lectures by Suresh Lecture for Class 10 in Hindi medium



In this youtube channel you can find video for class 10 Science (Physics, Chemistry and Biology), 11th Class Physics, Class 9 Mathematics. NCERT Solution in Hind Medium by Suresh Lecturer
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Thursday, June 1, 2017

Pair of Linear Equations in two variables 1

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Tuesday, March 14, 2017

Reasoning - Clocks

घड़ियाँ 

SSC, बैंकिंग आदि परीक्षाओं घड़ी पर आधारित प्रश्न आमतौर पर पूछे जाते हैं। घड़ी की सुइयों के बीच कोण, सुइयों की दिशा, दर्पण प्रतिबिंब, समय आदि के आधार पर अभ्यर्थियों का तर्कशक्ति परीक्षण किया जाता है। कुछ मुख्य प्रश्न शार्ट-कट सूत्र सहित नीचे दिये गए है। 
प्रश्न 1. यदि किसी घड़ी में समय 5 बजकर 20 मिनट है, तो दर्पण में बन रहे घड़ी के प्रतिबिंब में क्या समय दिखाई देगा?
  1. 6 बजकर 40 मिनट 
  2. 8 बजकर 30 मिनट
  3. 7 बजकर 40 मिनट
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं। 
Ans. (1) 6 बजकर 40 मिनट
Trick: दर्पण में बन रहे घड़ी के प्रतिबिंब में समय = 11:60 - 5:40 = 6 : 20 
(दर्पण में समय देखने के लिए घड़ी के समय को 11:60 में से घटा देते हैं। 12 बजे को 0 मानना होगा)
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Wednesday, January 4, 2017

LCM and HCF

ल. स. और म. स.

लघुतम समापवर्त्य और महतम समापवर्तक (Least Common Multiple and Highest Common Factor) प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण Topic है। CAT, NTSE, SSC CGL, SSC CHSL, Bank PO Clerk, LIC, NIFT, CDS व अन्य कई UPSE की परीक्षाओं में इस विषय से संबन्धित प्रश्न पूछे जाते है। LCM और HCF के जुड़े कुछ मत्वपूर्ण परिभाषाएँ, सूत्र, शॉर्ट कट, पिछली परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न नीचे दिए गए है। 

लघुतम समापवर्त्य (LCM) : दो या दो से अधिक दी गई  संख्याओं का LCM वह छोटी से छोटी  संख्या है जिसको  दी गई संख्याएँ पूरा-पूरा विभाजित करती है। जैसे संख्याओं 12 और 18 का LCM 36 होगा क्योंकि 36 वह छोटी से छोटी संख्या है जिसे 12 और 18 पूरा-पूरा भाग देते है। 

महतम समापवर्तक (HCF) : दो या दो से अधिक दी गई  संख्याओं का HCF वह बड़ी से बड़ी संख्या है जो  दी गई संख्याओं को पूरा -पूरा विभाजित करती है। जैसे संख्याओं 12 और 18 का HCF 6 होगा क्योंकि 6 वह बड़ी से बड़ी संख्या है जो  12 और 18 को पूरा -पूरा विभाजित करती है।

संख्याओं का LCM ज्ञात करने की विधि : संख्याओं का LCM ज्ञात करने के लिए हम गुणनखंड विधि का प्रयोग करते है। जो कि निम्नलिखित उदाहरण से स्पष्ट है। 
उदाहरण : वह छोटी से छोटी संख्या ज्ञात करें जो  12,16,24 और 36 से पूरी-पूरी विभाजित हो । 
हल : ऐसी संख्या 12,16,24 और 36 का LCM होगी, जो कि हम इस प्रकार ज्ञात कर सकते है। 
lcm and hcf for sainik school
इस प्रकार LCM = 2×2×2×2×3×3 = 144 
इसलिए, 144 वह छोटी से छोटी संख्या है जो   12,16,24 और 36 से पूरी-पूरी विभाजित होती है। 
उदाहरण : वह छोटी से छोटी संख्या ज्ञात करें जो  12,16,24 और 36 से भाग देने पर प्रत्येक दशा में 5 शेष रहे। 
हल : ऐसी संख्या LCM + शेष के बराबर होती है। अत: वांछित संख्या = 144+5 =149
उदाहरण : चार घंटियाँ क्रमश: 12 मिनट, 16 मिनट, 24 मिनट और 36 मिनट के समय अंतराल पर बजती है। यदि वे सुबह 8 बजे चारों एक साथ बजती हो तो पुन: एक साथ कब बजेगी?
हल : 8बजे + LCM मिनट बाद = 8 बजे +144 मिनट = 10 बजकर 24 मिनट पर। 

संख्याओं का HCF ज्ञात करने की विधि :
(i)भाग विधि - HCF ज्ञात करने के लिए  भाग विधि एक संक्षिप्त विधि है।  जैसे 24 और 36 का HCF भाग विधि द्वारा इस प्रकार ज्ञात कर सकते है।
lcm and hcf short tricks
इस प्रकार 24 और 36 का HCF =12 है। 
(ii) गुणनखंड विधि (Prime Factorisation Method) : दो या दो से अधिक संख्याओं का HCF = उभयनिष्ट गुणांखंडों का गुणनफल
उदाहरण: 24 और 36 का HCF 
lcm and hcf for navodaya vidyalaya


घात वाली संख्याओं का LCM और HCF :
LCM = दी गई संख्याओं में संबद्ध प्रत्येक अभाज्य  गुणनखंड (Evert Prime Factor) की सबसे बड़ी घात का गुणनफल 
HCF= दी गई संख्याओं में प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड (Every Common Prime Factors) की सबसे छोटी घात का गुणनफल 
lcm and hcf of two numbers

भिन्नों का LCM और HCF : भिन्नों का LCM और HCF ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सूत्रो का प्रयोग करते है। 
lcm and hcf of fractions
 LCM और HCF के बारे में महत्वपूर्ण बिन्दु :
  • दो संख्याओं तथा उनके LCM और HCF के बीच संबंध : पहली संख्या × दूसरी संख्या = LCM×HCF
  • नोट: उपर्युक्त सूत्र केवल दो ही संख्याओं के लिए हमेशा सत्य होता है, तीन संख्याओं के लिए नहीं। 
  • यदि कोई सवाल इस प्रकार का हो: वह बड़ी से बड़ी संख्या ज्ञात करें जो 12, 20 और 30 को पूरा-पूरा भाग दे सके, ऐसे सवालों में उत्तर के लिए  दी गई संख्याओं 12,20 और 30 का HCF ज्ञात करना होता है। 

  • यदि कोई सवाल इस प्रकार का हो: वह बड़ी से बड़ी संख्या ज्ञात करें जो 12, 20 और 30 को पूरा-पूरा भाग दे सके, ऐसे सवालों में उत्तर के लिए  दी गई संख्याओं 12,20 और 30 का HCF ज्ञात करना होता है। 
  • वह बड़ी से बड़ी संख्या ज्ञात करे जिससे यदि 38, 58 और 95 को भाग करे तो क्रमश: 2, 4 और 5 शेष रहे । ऐसे सवालों को हल करने के लिए (38-2), (58-4) और (95-5) का अर्थात 36, 54 और 90 HCF ज्ञात करते है।Ans.= 18। 
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    Roman Number System

    रोमन पद्धति 


    (यह चैप्टर अध्यापक  पात्रता परीक्षा, नवोदय विद्यालया प्रवेश परीक्षा, सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा, बी. एड. आदि परीक्षाओं के लिए अति महत्वपूर्ण है। )
     हम 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,........ आदि अंकों का प्रयोग करते हुए संख्याओं को लिखने के लिए जिस पद्धति का प्रयोग करते हैं उसे हिन्दू-अरेबिक पद्धति कहते है। रोमन पद्धति संख्या लिखने की एक पुरानी पद्धति है, जिसे आज भी कई जगह प्रयोग किया जाता है।
    रोमन पद्धति में संख्याओं 1,2,3,4,5,6,7,8,9 व 10 के लिए क्रमश: ये प्रतीक प्रयोग किए जाते है : I, II, III, IV, V, VI, VII, VIII, IX व X . इसके अलावा 50 =L, 100=C, 500=D & 1000= M  का प्रयोग होता है।

    रोमन पद्धति के नियम :

    • किसी प्रतीक की जितनी बार पुनरावृति होती है उसका मान उतनी ही बार जोड़ दिया जाता है। जैसे III = 3 तथा XX = 20 आदि। लेकिन किसी भी प्रतीक की तीन से अधिक बार पुनरावृति नहीं हो सकती। 
    • प्रतीक V, L और D की कभी पुनरावृति नहीं होती। 
    • छोटे मान वाला प्रतीक बड़े मान वाले प्रतीक के दाईं ओर (Right Side)लगाने पर बड़े प्रतीक के मान में छोटे प्रतीक का मान जोड़ दिया जाता है। जैसे : VI = 5+1 = 6,  VII = 5+2 = 7, LXV = 50+10+5 = 55 आदि। 


  • छोटे मान वाला प्रतीक बड़े मान वाले प्रतीक के बाईं  ओर (Left Side) लगाने पर बड़े प्रतीक के मान में से छोटे प्रतीक का मान घाटा  दिया जाता है। जैसे : IV = 5-1 = 4,  IX = 10-1 = 9, XC = 100-10=90 आदि। 
  • प्रतीक V, L और D को कभी भी बड़े मान के बाईं ओर (Left) में नहीं लिखा जा सकता। 
  • I को केवल V और X में से घटाया जा सकता है। X को केवल L, M और C में से ही घटाया जा सकता है। 
  • रोमन पद्धति के उदाहरण : 
  • 68 = 60+8 = (50+10)+8 = LX +VIII = LXVIII
  • 97= 90+7 = (100-10) + 7 = XC+VII 
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    Tuesday, January 3, 2017

    Indices and Surds

    घातांक व करणी

    घातांक का अर्थ 

    हम बड़ी संख्याओं को घातांकों का प्रयोग करके संक्षिप्त रूप में लिख सकते हैं जैसे -
    625 = 5×5×5×554
    यहाँ '5' आधार (base) और '4' घातांक (exponent or Index) कहलाता है।

    किसी संख्या को घातांकीय रूप में लिखना :
    किसी संख्या को घातांकीय रूप में लिखने के लिए, उस संख्या के अभाज्य गुणनखंड बनाए जाते हैं। अभाज्य गुणांखंडों में जो अंक जितनी बार आता है उसकी उतनी ही घाट लगा दी जाती है।
    उदाहरण : (i) 72        (ii) 16000  का घातांकीय रूप लिखो ।
    हल : (i) 72 = 2×2×2×3×3 = 23 × 32
               (ii) 16000  = 2×2×2×2×2×2×2×5×5×5= 27 × 53
    उदाहरण:(- 5)3  का मान ज्ञात करें ।
    हल : (- 5)= (-5) × (-5) × (-5)  = -125

    Laws of Indices (घातांकों के नियम) 

    यदि a और b दो शुन्येतर (Non-zero) परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers) हैं तथा m और n कोई पूर्णाक (Integers) है तब घातांकों पर निम्नलिखित नियम लागू होते है
    rules of indices
    • Surds (करणी) : यदि a एक परिमेय संख्या और n एक धनात्मक पूर्णांक हो तब यदि
      एक अपरिमेय संख्या हो, तब  n वीं घात की एक करणी कहलाती है। 
    • =  a1/n  होता है।
    • करणी के नियम (Rules of Surds): करणी के नियम घातांकों के नियमों के समतुल्य ही होते है। जो दी निम्न सारणी मे दिये गए है। 
      rules of surds

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    Monday, January 2, 2017

    Cube and Cube Root

    घन और घनमूल 

    एक संख्या x को स्वयं से ही तीन बार गुणा करने पर प्राप्त गुणनफल (x×x×x) संख्या x का घन (Cube) कहलाता है। तथा x गुणनफल का घनमूल (Cube Root) कहलाता है।  के घन को x3  द्वारा तथा x के घनमूल को ∛x द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। 
    जैसे : 4 का घन = 43  = 4×4×4 = 64
    तथा  64 का घनमूल = ∛64 = 641/3 = 4 होता है। 
    घन और घनमूल के तथ्य को और अधिक समझने के लिए नीचे एक सारणी दी गई है इसे ध्यान से देखें-
    cube and cube roots

    • 1, 8, 27, 64, 125, 216......  आदि संख्याएँ पूर्ण घन (Perfect Cube) संख्याएँ कहलाती है। 
    • घन और घनमूल (Cube and Cube Root) के प्रश्नों को शीघ्रता से हल करने के लिए निम्नलिखित सारणी याद करना जरूरी है। 

    संख्या
    घन
    11
    11
    ×
    11
    ×
    11
    =
    1331
    12
    12
    ×
    12
    ×
    12
    =
    1728
    13
    13
    ×
    13
    ×
    13
    =
    2197
    14
    14
    ×
    14
    ×
    14
    =
    2744
    15
    15
    ×
    15
    ×
    15
    =
    3375
    16
    16
    ×
    16
    ×
    16
    =
    4096
    17
    17
    ×
    17
    ×
    17
    =
    4913
    18
    18
    ×
    18
    ×
    18
    =
    5832
    19
    19
    ×
    19
    ×
    19
    =
    6859
    20
    20
    ×
    20
    ×
    20
    =
    8000
    • किसी संख्या का घनमूल (Square Root) अभाज्य गुणनखंड विधि द्वारा ज्ञात करते है। जैसे 216 का घनमूल नीचे दर्शाया गया है। 
    216 = 2×2×2×3×3×3

    ∛216 = 2×3 = 6 Ans.
    प्रश्न एक घनाकार टंकी की एक भुजा ज्ञात करें जिसका आयतन 2197 m3 है।
    हल : घनाकार टंकी की भुजा = ∛(आयतन) = ∛2197 = 13 m

    नोट: यहाँ अभाज्य गुणांखंडों के तीन- तीन एक जैसे अंकों के ग्रुप बनाए जाते है। और घनमूल के लिए एक ग्रुप का एक अंक ले लिया जाता है और गुना कर दी जाती है, इस प्रकार हमे दी गई संख्या का घनमूल प्राप्त हो जाता है। 
    • यदि किसी संख्या के अभाज्य गुणांखंडों के तीन-तीन के ग्रुप (त्रिक) पूरे नहीं बनते तो वह संख्या पूर्ण घन संख्या (Perfect Square Number) नहीं है। 
    • किसी संख्या को गुना/भाग  करके पूर्ण घन बनाने के लिए- उस संख्या के अभाज्य गुणनखंड बनाए जाते है , गुणनखंडों के जो त्रिक पूरे नहीं है, उनको पूरा करने के लिए जिस संख्या से गुना/भाग  करनी होती है वही पूछे गए प्रश्न का उत्तर होता है। 
    प्रश्न : 68,600 को किस छोटी से छोटी संख्या से गुना की जाए कि वह पूर्ण घन संख्या बन जाए?
    हल:  68,600 = 2 × 2 × 2 × 5 × 5 × 7 × 7 × 7  
    यहाँ 5 की त्रिक पूरी करने के लिए एक अंक 5 की और आवश्यकता है। इसलिए 68600 को पूर्ण घन संख्या बनाने के लिए 5 से गुना करनी होगी। 

    प्रश्न : 68,600 को किस छोटी से छोटी संख्या से भाग की जाए कि वह पूर्ण घन संख्या बन जाए?
    हल:  68,600 = 2 × 2 × 2 × 5 × 5 × 7 × 7 × 7  
    यहाँ सभी  त्रिक पूरी करने के लिए 5 × 5 को हटाया जा सकता है।  इसलिए 68600 को पूर्ण घन संख्या बनाने के लिए 25 से भाग करनी होगी।  

    • एक ऐसी संख्या जिसे दो घनों के योग के रूप में दो भिन्न प्रकारों से  व्यक्त किया जा सकता है उन्हें हार्डी-रामानुजन संख्याएँ (Hardy-Ramanujan Numbers) कहा जाता है। जैसे 1729, 4104, 13832 आदि 
      cube and cube root short cut methods
    • 1729 सबसे छोटी हार्डी-रामानुजन संख्या है। 
    • दशमलव वाली संख्याओं का घनमूल ज्ञात करने के लिए उसे साधारण भिन्न के  (p/q के)  रूप में लिखा जाता है। फिर अंश व हर का अलग-अलग घनमूल ज्ञात कर लिया जाता है और वापिस दशमलव  भिन्न में बदल दिया जाता है। जैसे 0.125 का घनमूल = 125/1000 का घनमूल  = 5/10 =0.5 Ans.
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    Tests of Divisibility

    विभाज्यता के नियम 

    1. 2 से विभाज्यता का नियम - जिस संख्या के इकाई के स्थान पर 0,2,4,6 या 8 आता है, तो वह संख्या 2 से विभाजित होती है। जैसे - 12,24,456,3158,789540 आदि ।
    2. 3 से विभाज्यता का नियम -  जिस संख्या के अंकों का योग 3 से विभाजित हो जाता है, तो वह संख्या भी 3 से विभाजित होती है। जैसे - 456, 783, 12348 आदि। 
    3. 4 से विभाज्यता का नियम -  यदि किसी संख्या के इकाई और दहाई के अंकों से बनी संख्या 4 से विभाजित होती है तो वह संख्या भी 4 से विभाजित होती है। जैसे - 348, 7856, 369588, 5600 आदि 
    4. 5 से विभाज्यता का नियम -  जिस संख्या के इकाई के स्थान पर 0 या 5 आता है, तो वह संख्या 5 से विभाजित होती है। जैसे 45, 450 , 10000, 78645 आदि ।
    5. 6 से विभाज्यता का नियम - जो संख्या 2 और 3 दोनों से विभाजित होती है वह संख्या 6 से भी विभाजित होती है। जैसे - 630 , 210 आदि। 
    6. 7 से विभाज्यता का नियम - आदि किसी संख्या के इकाई के अंक का दोगुना बाकी  अंकों से बनी संख्या से घटाने पर प्राप्त संख्या 7 से विभाजित होती है तो वह संख्या भी 7 से पूर्णत: विभाजित होगी।जैसे 2170, 6377 आदि । 
    7. 8 से विभाज्यता का नियम -   यदि किसी संख्या के इकाई, दहाई और सैकड़े के अंकों से बनी संख्या 8 से विभाजित होती है तो वह संख्या भी 8 से विभाजित होती है। जैसे -4528, 69456, 1000 आदि 
    8. 9 से विभाज्यता का नियम -  जिस संख्या के अंकों का योग 9 से विभाजित हो जाता है, तो वह संख्या भी 9 से विभाजित होती है। जैसे - 4536, 7839, 12348 आदि।
    9. 10 से विभाज्यता का नियम -  जिस संख्या के इकाई के स्थान पर 0  आता है, तो वह संख्या 10 से विभाजित होती है। जैसे 680, 450 , 10000, 78640 आदि। 
    10. 11 से विभाज्यता का नियम - यदि किसी संख्या के सम स्थानों पर आए अंकों के योग और विषम स्थानों पर आए अंकों के योग का अंतर 0 हो या 11 से विभाजित होता हो तो वह संख्या भी 11 से विभाजित होगी। जैसे 2442, 9482 आदि ।
    11. 12 से विभाज्यता का नियम - जो संख्या 3 और 4  दोनों से विभाजित होती है वह संख्या 12 से भी विभाजित होती है। जैसे - 6300 , 21408 आदि ।
    12. 13 से विभाज्यता का नियम - किसी संख्या के इकाई के अंक का चार गुना बाकी अंकों से बनी संख्या में जोड़ने पर प्राप्त योगफल यदि 13 से विभाजित होता है तो वह संख्या भी 13 से विभाजित हो जाएगी। जैसे - 2639 
    13. 15 से विभाज्यता का नियम - जो संख्या 3 और 5 दोनों से विभाजित होती है वह संख्या 12 से भी विभाजित होती है। जैसे - 6300 , 21240, 43125 आदि ।

    प्रतियोगी परीक्षा आधारित अन्य महत्वपूर्ण विभाज्यता संबंधी नियम 

    1. n3 - n सदैव 6 से विभाजित होगा।
    2. n2(n2 - n) सदैव 12 से विभाजित होगा।
    3. (10n-1) एक भाज्य संख्या है, यदि n एक सम संख्या है तो यह 11 से भी विभाजित होगी।
    4. (an+bn) सदैव (a+b) से विभाज्य होती है।
    5. (an- bn) सदैव (a-b) से विभाज्य होती है और यदि n एक सम संख्या है तो यह (a+b) से भी विभाज्य होगी ।
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    Square and Square Root

    वर्ग और वर्गमूल 

    जब किसी संख्या x को  उसी संख्या से गुणा किया जाता है तो प्राप्त गुणनफल (अर्थात x × x )  का वर्ग कहलाता है। तथा x,  गुणनफल  का वर्गमूल कहलाता है। x के वर्ग को  x2 द्वारा तथा वर्गमूल को  √x द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
    जैसे  4 का वर्ग = 42 = 4× 4 = 16 होता है तथा 16 का वर्गमूल  (√16) = 4 होता है।
    इसी प्रकार -
    संख्या
    वर्ग
    1
    1
    ×
    1
    =
    1
    2
    2
    ×
    2
    =
    4
    3
    3
    ×
    3
    =
    9
    4
    4
    ×
    4
    =
    16
    5
    5
    ×
    5
    =
    25
    6
    6
    ×
    6
    =
    36
    7
    7
    ×
    7
    =
    49
    8
    8
    ×
    8
    =
    64
    9
    9
    ×
    9
    =
    81
    10
    10
    ×
    10
    =
    100

    वर्गमूल : वर्गमूल वर्ग से प्रतिलोम संक्रिया है।
    √1 =1, √4= 2, √9 =3, √16 = 4, √25=5, √36=6, √49=7, √64=8, √81=9, √100=10

    11 से आगे कुछ महत्वपूर्ण  संख्याओं के वर्ग इस प्रकार है-
    (सवालों को तेजी से हल करने के लिए इन संख्याओं का वर्ग याद करना अति आवश्यक है। )
    संख्या
    वर्ग संख्या  
    11
    11
    ×
    11
    =
    121
    12
    12
    ×
    12
    =
    144
    13
    13
    ×
    13
    =
    169
    14
    14
    ×
    14
    =
    196
    15
    15
    ×
    15
    =
    225
    16
    16
    ×
    16
    =
    256
    17
    17
    ×
    17
    =
    289
    18
    18
    ×
    18
    =
    324
    19
    19
    ×
    19
    =
    361
    20
    20
    ×
    20
    =
    400
    21
    21
    ×
    21
    =
    441
    22
    22
    ×
    22
    =
    484
    23
    23
    ×
    23
    =
    529
    24
    24
    ×
    24
    =
    576
    25
    25
    ×
    25
    =
    625
    26
    26
    ×
    26
    =
    676
    27
    27
    ×
    27
    =
    729
    28
    28
    ×
    28
    =
    784
    29
    29
    ×
    29
    =
    841
    30
    30
    ×
    30
    =
    900
    35
    35
    ×
    35
    =
    1225
    40
    40
    ×
    40
    =
    1600
    45
    45
    ×
    45
    =
    2025
    50
    50
    × 
    50
    =
    2500

    वर्ग व वर्गमूल के बारे मे महत्वपूर्ण बिन्दु: 

    • जो संख्या किसी संख्या का वर्ग होती है, वह पूर्ण वर्ग संख्या कहलाती है। जैसे : 1,4,9,16,25,36,49 आदि सभी पूर्ण वर्ग संख्या है। 
    • जिन संख्याओं का इकाई का अंक 2,3,7 या 8 हो वे कभी भी पूर्ण वर्ग संख्या नहीं हो सकती। 
    • दो लगातार प्राकृत संख्याओं n और (n+1) के वर्गों के बीच 2n प्राकृत संख्याएँ होती है। जैसे 92 तथा 102 के बीच 18 प्राकृत संख्याएँ होती है।
    • प्रथम n प्राकृत विषम संख्याओं का योग n2 के बराबर होता है। जैसे -
    • जिन संख्याओं के अंत में 5 होता है उनका वर्ग बिना गुना किए direct method से निकाला जा सकता है। जैसे- 
    • वैसे तो किसी संख्या का वर्ग ज्ञात करने के लिए दी गई संख्या को उसी संख्या से गुणा करनी होती है। जैसे - संख्या 103 का  वर्ग ज्ञात करने के लिए 103×103 ज्ञात किया जाता है। लेकिन आसानी के लिए हम बीजगणित के सूत्रो (a+b)2  =a2+ 2ab + b2  या (a-b)=a2- 2ab + b2  का प्रयोग करते है। 
    • अभाज्य गुणनखंड विधि द्वारा किसी संख्या का वर्गमूल ज्ञात करना: इस विधि मे दी गई संख्या के अभाज्य गुणनखंड बना लिए जाते है, उसके बाद एक जैसे दो-दो गुणांखंडों के जोड़े बना लिए जाते है। प्रत्येक जोड़े का एक अंक अंक लेकर गुना कर देते है, इस प्रकार हमें दी गई संख्या का वर्गमूल प्राप्त हो जाता है। उदाहरण - निम्न संख्याओं के वर्गमूल ज्ञात करे: 324, 256
    • उदाहरण: 2352 को किस संख्या से गुणा  करे कि यह एक पूर्ण वर्ग संख्या बन जाए। 
               3252 = 2×2×2×2×3×7×7 यहाँ अंक 3 का जोड़ा नहीं है इसलिए 2352 एक पूर्ण संख्या नहीं है अत: 3 से            गुणा करने पर यह संख्या पूर्ण वर्ग बन जाएगी । 
    • उदाहरण: 2352 को किस संख्या से भाग  करे कि यह एक पूर्ण वर्ग संख्या बन जाए। 
               3252 = 2×2×2×2×3×7×7 यहाँ अंक 3 का जोड़ा नहीं है इसलिए 2352 एक पूर्ण संख्या नहीं है अत: 3 से            भाग करने पर यह संख्या पूर्ण वर्ग बन जाएगी । 
    • उपर्युक दोनों उदाहरणों से स्पष्ट है कि यदि पूर्ण वर्ग बनाने के लिए "किस संख्या से गुणा " या "किस संख्या से भाग" पूछा जाए तो दी गई संख्या का अभाज्य गुणनखंड करते है उसके बाद जो संख्याएँ जोड़े मे नहीं होती उनकी गुणा कर देते है , यही गुणनफल हमारे प्रश्न का उत्तर होगा । 

    • यदि पूर्ण वर्ग बनाने के लिए "क्या जोड़ा जाए  " या "क्या घटाया जाए " पूछा जाए तो हमें भाग विधि द्वारा वर्गमूल ज्ञात करना होगा। 
    • भागविधि द्वारा वर्गमूल निम्नलिखित उदाहरणों द्वारा स्पष्ट है - 
    • उदाहरण : वह छोटी से छोटी संख्या ज्ञात कीजिए जिसे 5607 (i) में से घटाने पर एक पूर्ण वर्ग संख्या बन जाए (ii) में जोड़ने पर एक पूर्ण वर्ग संख्या बन जाए।
    • यदि कोई n अंकों कि पूर्ण वर्ग संख्या है तो उसके वर्गमूल में n/2 अंक होंगे यदि n सम है और (n+1)/2 अंक होंगे यदि n विषम है। 
    • पूर्ण वर्ग संख्याओं के अंत में शून्यों कि संख्या सम होती है। 
    • यदि a और b दो धनात्मक संख्याएँ है तो- 
    • उपर्युक्त नियमों का प्रयोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं मे प्रश्नों को जल्दी हल करने के लिए प्रयोग किया जाता है। 
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